आयुर्वेद की पांच अतुल्य पेड़ एवं जड़ी बूटियां जिनके बारे में शायद ही आप जानते होंगे

 कुस्ट या कूठ

 उत्तराखंड के पहाड़ों में पाए जाने वाला यह पौधा सौससुरिया लेप के नाम से वैज्ञानिकों द्वारा पहचाना गया है  उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में इसकी खेती होती है इसके पुष्प एक से डेढ़ इंच गोल गुच्छे दार गहरे नीले बैंगनी रंग के काले होते हैं इसकी जड़ काली बदामी गंध युक्त तथा मजबूत होती है चलिए बात करते हैं इसके उपयोग एवं फायदे की
उपयोग

  • इस मूल का उपयोग मोटापा कम करने में किया जाता है 
  • घावों इसकी मल हम का उपयोग किया जाता है सिर पर फोड़े फुंसी में इसके चूर्ण को खपरैल में भूनकर तेल के साथ लगाया जाता है
  • सिर के बालों को धोने तथा काले करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है
  • यह हृदय को बल प्रदान करता है 
  • हाथ पैरों की सूजन सिर दर्द तथा मौच में इसे गुलाब जल के साथ प्रयोग करते हैं

चित्रक या चित्रा

सामान्य रूप से यह पौधा 2 से 5 फुट तक ऊंचा होता है यह देश के सभी प्रांतों में पाया जाता है इसे वैज्ञानिक तौर पर प्लंबागो ज़यलनिक्स के नाम से भी जाना जाता है इसके कांड पर लंबाई मैं धारियां होती है इसके पत्ते 1 से 5 इंच तक लंबे अंडाकार नोकदार चिकने एवं कोमल होते हैं इस पर स्वेता एवं रक्त वर्ण के पुष्प होते हैं इसके फल गोल लंबे सूक्ष्म तथा चिपचपे रोवो से युक्त होते हैं इसकी जड़े काल एवं भूरे रंग की होती है चली गई अब बात कर लेते हैं इसके फायदे की

उपयोग
  • इसका प्रयोग भूख बढ़ाने खाना पचाने तथा अतिसार में करते हैं
  • बादी सुखे अर्श में इसे दही के साथ सेवन करते हैं
  • इसके छार का प्रयोग यकृत एवं प्लीहा वृद्धि में मट्ठे के साथ करते हैं


वाचा या बच

वर्ष के 12 महीने में खीलने वाला यह पौधा दो से चार फीट तक ऊंची होती है विशेषकर जलयुक्त स्थानों पर जैसे मणिपुर ,कश्मीर आदि पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में पाया जाता है इसके पत्र तलवार सदृश होते हैं प्रत्येक गांठ के चारों और सदन रोवे होते हैं और पुष्प  सदन मंजारियों में होता है

उपयोग 

  • इसका उपयोग हिस्टीरिया में किया जाता है इसके सेवन से धारणा सक्ती बढ़ती है इसको शहद एवं दूध के साथ प्रयोग करते हैं
  • स्मरण शक्ति के हराश तथा वाणी की जड़ता में इसका प्रयोग किया जाता है 
  • सर्दी खांसी गले में सूजन तथा बच्चों के दांत निकलते समय इसका प्रयोग करते हैं


कपूर कचरी

इसका वैज्ञानिक नाम हेडायचियम सपिकैटम है इसके पौधे भारत के अनेक भागों में पाए जाते हैं इसके पत्र हल्दी पत्र के समान होते हैं पौधे के मूल में आमा हल्दी जैसे कंद होते हैं जिसका औषधि के रूप में प्रयोग होता है इसमें सुगंध होती है इसीलिए इसे गंदमूल भी कहते हैं चलिए इसे उपयोग के बारे में जानते हैं

उपयोग

  • इसका उपयोग खांसी एवं गले की खराश दूर करने में किया जाता है गायक से आवाज साफ करने के लिए चूसते हैं
  • इस के ताजे कंधों का पार्क प्रसूता स्त्रियों के लिए पौष्टिक होता है
  • जलोदर (पेट में पानी होना )मैं इसके पत्तों का रस पिलाया जाता है
  • मौच में इस को पीसकर फिटकरी के साथ मिलाकर प्रयोग करते हैं


विभीतक  या बहेड़ा 
इसका वैज्ञानिक नाम टर्मिनलों बेलेरिका है यह विशाल पोधा 60 - 100 फीट तक ऊंचा होता है यह सभी प्रांतों में प्राय निचली पहाड़ियों पर अधिक पाया जाता है इसकी छाल कालापन या नीला रंग की है इसका फल 1 इंच लंबा गोल एवं अंडाकार होता है
 उपयोग

  • बहेड़ा चूर्ण शहद के साथ देने पर स्वास कास रोगों में लाभ दायक होता है
  •  इसका का प्रयोग गले के रोग स्वर, भंग उदर रोग ,कुष्ठ आदि में किया जाता है 





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