ऋषिकेश के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल || Rishikesh Ke Prashid Darshniya Isthal

हेल्लो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग के इस नई पोस्ट में जिसमें आज हम बात करने वाले है ऋषिकेश के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल की !
ऋषिकेश उत्तराखण्ड राज्य के देहरादून जिल्ले का एक शहर है इसे गढ़वाल हिमालय का प्रवेश द्वार तथा योग की वैश्विक राजधानी के नाम से भी जानी जाती है चारों तरफ छोटे-छोटे पहाड़ तथा हरियाली लिए पेड़ इस की प्राकृतिक सुंदरता की शोभा बढ़ाते हैं ऋषिकेश का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का शहर है ऋषिकेश को भारत का नंबर वन तीर्थ स्थल माना जाता है शायद से यही कारण है कि लोग काफी मात्रा में पधार कर शहर के दर्शनीय स्थानों के दर्शन तथा यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का का अनुभव करते हैं साथ ही यह भी कहा जाता है कि यह केदारनाथ , बद्रीनाथ और यमुनोत्री , गंगोत्री का प्रवेश द्वार के रूप में भी जाना जाता है अगर कोई व्यक्ति सच्चे मन से यहां पर ध्यान करता है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है

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  ऋषिकेश के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल

नीलकंठ महादेव मंदिर - नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश का सर्वश्रेष्ठ दर्शनीय स्थल है नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह लगभग 5500  फिट  की ऊंचाई पर स्थित एक पर्वत की चोटी पर स्थित है अगर इसके इतिहास की बात करें तो कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष  ग्रहण किया विष  पीने के बाद विष के असर के कारण भगवान शिव जी का गला नीला पड़ गया था तो उन्हें तब से भगवान नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है तब  इस जगह पर एक मंदिर का निर्माण किया गया था तब से जो भी भगवान शिव जी के भक्त होते हैं वह यहां जरूर आते हैं यहां पर एक झरना का पानी भी बहता है  उसके बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव जी के दर्शन करने से पहले सभी भक्तों को इस झरने के नीचे स्नान करना पड़ता है इसके बाद ही भगवान शिव जी के दर्शन किए जाते हैं   

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लक्ष्मण झूला - लक्ष्मण झूला ऋषिकेश के प्रसिद्ध झूलों में से एक हैं जो कि ऋषिकेश से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह गंगा नदी के ऊपर बना एक पुल जिसे लक्ष्मण झूला के नाम से ही जाना जाता है इस पुल के पश्चिमी किनारे पर भगवान श्री लक्ष्मण जी का मंदिर है तथा इसकी दूसरी तरफ श्री राम जी का मंदिर बना हुआ है इसके बारे में कहा जाता है कि श्री राम भगवान जी स्वयं इस स्थान पर पधारे थे ऐतिहासिक कहानी के अनुसार भगवान श्री राम के अनुज लक्ष्मण ने इस गंगा नदी को जूट की रस्सी के सहायता से पार किया था शायद तब से ही स्वामी विशुद्धानंद जी की प्रेरणा से शुहनुबला ने यह पुल सन 1889 में बनाया था यह पुल काफी बड़ा है   दोनों तरफ पर्वतों की खूबसूरती के कारण ज्यादातर लोग इसी पुल के सारे नदी को पार करते हैं इस पुल के जरिए  जब भी नदी कों पार किया जाता है पुल के सेंटर तक पहुंचते पहुंचते यह पुल हल्का हल्का हिलता रहता है दोनों तरफ मंदिरों के स्थिर होने से श्रद्धालु भी इसी रास्ते भगवान के दर्शन किया करते है  

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परमार्थ निकेतन - परमार्थ निकेतन आश्रम ऋषिकेश के जाने माने आश्रमों में से एक है यह ऋषिकेश से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं हिमालय की गोद में और गंगा नदी के तट पर बसा परमार्थ निकेतन की स्थापना सन 1942 में संत सुखदेव आनंद जी महाराज ने की ,इसके अध्यक्ष सन 1986 में स्वामी चिदानंद सरस्वती थे परमार्थ निकेतन को ऋषिकेश के सबसे बड़े आश्रमों में गिना जाता है यह ऋषिकेश के सबसे बड़े आश्रम होने के कारण इसमें 1000 से अधिक कक्षों का निर्माण किया गया है यहां दिन प्रतिदिन लोगों की अच्छी खासी भीड़ एकत्रित होती हैं आश्रम में दिन प्रतिदिन सुबह-सुबह सामूहिक पूजा  , योग ,किए जाते हैं साथ ही शाम के समय यहां सूर्यास्त के दौरान गंगा स्नान भी किया जाता है

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त्रिवेणी घाट - ऋषिकेश के प्रसिद्ध जाने-माने स्थानों में त्रिवेणी घाट का नाम भी लिया जाता है ऋषिकेश से महज साढ़े चार किलोमीटर दूर
 गंगा नदी के किनारे स्थित त्रिवेणी घाट ऋषिकेश के जाने-माने घाटों में से सबसे बड़ा घाट माना जाता है कहा जाता है कि भगवान कृष्ण द्वारा इस घाट का दौरा तब किया गया था जब वह जरा के तीर से आहत हो गया था इस त्रिवेणी घाट स्थान का प्रयोग भक्तों द्वारा अपने किए गए पापों को मिटाने गंगा नदी में स्नान के द्वारा तथा अपने प्रिय जनों की अंतिम विदाई के लिए भी उसी स्थान का प्रयोग किया जाता है त्रिवेणी घाट पर हिंदू धर्म की जानी-मानी तीन प्रमुख नदियों का संगम भी इसी स्थान पर होता है जहां पर गंगा नदी के साथ-साथ यमुना और सरस्वती नदी का संगम आपको देखने को मिलेगा इस स्थान मैं स्थित प्रसिद्ध मंदिरों और प्रतिमाओं की बात करें तो एक तरफ अर्जुन को गीता ज्ञान देते हुए श्री कृष्ण की विशाल मनोहारी प्रतिमा और एक विशाल गंगा माता का मंदिर है साथ ही दूसरी तरफ शिवाजी की जटा से निकली गंगा की मनोहर प्रतिमा है यदि आप लोग इस के साए हैं तो आपको त्रिवेणी घाट के दर्शन जरूर करनी चाहिए  

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वीटलस आश्रम -  ऋषिकेश के प्रसिद्ध दर्शनीय  स्थलों में बीटल्स आश्रम का नाम भी सर्वश्रेष्ठ स्थान पर आता है ऋषिकेश से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर गंगा नदी के पूर्वी तट पर स्थित सन 1960 और 1970 के दशक के बीच यह स्थान इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ मैडिटेशन के रूप में यहां महर्षि महेश योगी के छात्रों के लिए प्रशिक्षण का केंद्र था जिन्होंने ट्रांसेडेंटल  मेडिटेशन तकनीकी विकसित की थी आश्रम देश के ही नहीं विदेशों से आने वाले पर्यटकों को भी मोहित करती है लोग काफी मात्रा में पधार कर इस आश्रम में उपस्थित प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेते हैं इस आश्रम को महर्षि महेश योगी जी की मृत्यु के बाद बंद कर दिया था लेकिन बाद में इसे पर्यटकों के लिए फिर से खोला गया ऋषिकेश के लोग अथवा इसके आसपास के लोग इसे चौरासी कुटिया के नाम से भी पहचानते हैं यदि आप ऋषिकेश आए हैं तो आपको यहां के दर्शन जरूर करनी चाहिए    


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                    केसे पहुंचे ऋषिकेश
 
यदि आप ऋषिकेश आना चाहते है तो यहां आने के लिए आपके सभी साधन मिल जायेगे ,रोड की पूरी कनेक्टविटी होने के कारण आप देश के किसी भी कोने से यहां आसानी से पहुंच सकते है, साथ ही भारतीय रेल सेवा भी यहां पे पूरी तरीके से जुड़ी हुई है और वायु मार्ग की बात करें तो यहां आप फ्लाईट के जरिए भी पहुंच सकते है 

सड़क मार्ग- सड़क मार्ग की बात करें तो ऋषिकेश देश की राजधानी दिल्ली से यह 241  किलोमीटर तथा वहीं यहां देहरादून से यह 46 किलोमीटर है उत्तराखण्ड के रामनगर से  ऋषिकेश की दूरी  186 किलोमीटर है अब आप के लोकेशन से जो भी शहर नजदीक पड़ता है आप वही से ऋषिकेश की यात्रा कर सकते है


रेल मार्ग- रेल मार्ग की बात करें तो ऋषिकेश का नियर रेल स्टेशन ऋषिकेश ही  है जो कि मेन ऋषिकेश से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है साथ ही यह रेल स्टेशन देश की राजधानी दिल्ली के नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से 234 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है वहीं दूसरी ओर यहां रेलवे स्टेशन देहरादून के रेलवे स्टेशन से की दूरी 179 किलोमीटर  पर स्थित है रामनगर रेलवे स्टेशन से की दूरी 379 किलोमीटर है

वायु मार्ग - वायु मार्ग की बात करें तो ऋषिकेश का नियर एयरपोर्ट  जब्बर हाटी  है जो कि ऋषिकेश से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है साथ ही यह से सभी प्रकार की घरेलू उड़ाने नियमित रूप से चलती रहती हैं   
 




 

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